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प्रिय छात्रों,

किं किं न साधयंति कल्पतेव विद्या?

विद्या रूपी कल्पवृक्ष से किन-किन इच्छाओं की पूर्ति नहीें हो सकती अर्थात समस्त इच्छाएं पूर्ण हो सकती हैं।

ईष्वर की सर्वोत्तम कृति मानव है क्योंकि उसे ईष्वर ने सोच कर काम करने की सर्वोच्च चेतना शक्ति प्रदान की है। यही एक कारण है कि हम अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ कहलाते हैंै। हम इस शक्ति का सदुपयोग कैसे करते हैं, यह हम पर निर्भर है। अनवरत् अच्छे कार्यों तथा प्रयासों से ही कोई महान् बनता है न कि जन्म से महान होता है।

समय का सदुपयोग जो कर सके वही अपने लक्ष्य को सहजता एवं सरलता से प्राप्त कर लेता है। जो समय का सदुपयोग नहीं करते है वह अपने लक्ष्य से कोसों दूर चले जाते हैं। समय अनमोल है, इस बात को हमें याद रखना चाहिये। समय की पाबंदी व्यक्ति को अनुषासित बनाती है। अनुषासित व्यक्ति में धैर्यता का गुण अपने आप ही आ जाता है। इसके फलस्वरूप अव्यवस्था नहीं होती तथा जल्दबाजी नहीं करनी पड़ती। असफलता ही सफलता की कुंजी है। कुछ लोग असफलता को अपराध मानते हैं, किंतु असफलता अपराध नहीं है वरन् लक्ष्य को छोटा करना अपराध है।

आपको अपने परिवार, गुरूजनों, महाविद्यालय और अपने देष पर गर्व होना चाहिये।

मैं आप सभी को आष्वस्त करना चाहूंगा कि जी.टी.बी. महाविद्यालय षिक्षा के स्तर एवं विकास प्रक्रिया को कायम रखने के लिए वचनबद्ध है। मैं हृदय से आभारी हूं उन पालकों, छात्रों व महाविद्यालय परिवार का जिनकी मदद से समस्त बाधाओं को पार करते हुये अपने लक्ष्य की ओर सतत् अग्रसर हैं।

शुभकामनाओं सहित…!

डाॅ. जी. एस. अरोरा
अध्यक्ष, शासी निकाय
जी.टी.बी. कॉलेज ऑफ
प्रोफेषनल एण्ड टैक्निकल एजुकेशन